कलयुग का आग़ाज़ !-नीरज कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Neeraj Kumar

कलयुग का आग़ाज़ !-नीरज कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Neeraj Kumar

 

कैसा ये अंधकार है
कैसा ये अनाचार है
कैसा ये अहंकार है
कैसा ये कु-संस्कार है

कैसी ये अफ़रा-तफ़री है
कैसी ये लूट-खसोट है
कैसा ये भ्रष्टाचार है
कैसा ये दुर्व्यवहार है

घमंडियों की सभा है
दुष्कर्मी का बोल-बाला है
दुराचारियों का राज है

सृष्टि के प्राणियों
शर्मसार संसार है
तुम समझ क्यों नहीं रहे
ये कलयुग का आग़ाज़ है

 

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