कर गई काम वो नज़र-कविता -फ़िराक़ गोरखपुरी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Firaq Gorakhpuri

कर गई काम वो नज़र-कविता -फ़िराक़ गोरखपुरी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Firaq Gorakhpuri

कर गई काम वो नज़र, गो उसे आज देखकर
दर्द भी उठ सका नहीं,रंग भी उड़ सका नहीं

तेरी कशीदगी में आज शाने-सुपुर्दगी भी है
हुस्न के वश में क्या है और,इश्क़ के वश में क्या नहीं

इससे तो कुफ्र ही भला, जो है इसी जहान का
ऐसे खुदा से क्या जिसे फुर्सते-मासिवा नहीं

वो कोई वारदात है, जिसको कहें कि हो गई
दर्द उसी का नाम है जो शबे-ग़म उठा नहीं

याद तो आये जा कि फ़िर,होश उड़ाये जा कि फ़िर
छाने की ये घटा नहीं,चलने की ये हवा नहीं

देख लिया वहाँ तुझे,दीदा-ए-एतबार ने
हाथ को हाथ भी जहाँ,सुनते हैं सूझता नहीं

कौलो-क़रार भी तेरे ख़्वाबो-ख़याल हो गये
वो न कहा था हुस्न ने इश्क़ को भूलता नहीं

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