कर्त्तव्य-पथ, कर्त्तव्य-पथ-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

कर्त्तव्य-पथ, कर्त्तव्य-पथ-नदी किनारे-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

कर्त्तव्य-पथ, कर्त्तव्य-पथ!

चाहे मिटे तेरा प्रणय,
चाहे जले तेरा हृदय,
चिर आंसुओं की बाढ़ में
बह जाय आशा का निलय,
पर तुझे जीना पड़ेगा जब तक पड़ा है सामने-
कर्त्तव्य-पथ, कर्त्तव्य-पथ!

कटु शूल कितने ही चुभें,
ज्वालामुखी कितने फटें,
पग रो पडें, चाहे थकें,
पर तुझे बढ़ना पड़ेगा जब तक पड़ा है सामने-
कर्त्तव्य-पथ, कर्त्तव्य-पथ!

मधु भी अगर बन जाय विष,
अंगार ही बरसाय शशि,
पर हो यही तेरी हविस,
मैं बढ़ूँगा, मैं लड़ूंगा-जब तक पड़ा है सामने-
कर्त्तव्य-पथ, कर्त्तव्य-पथ!

मानव कभी परवश नहीं,
विधि-वाम के आश्रित नहीं,
उसकी दया है विश्व भी,
इसलिए दुर्बल न बन जब तक पड़ा है सामने-
कर्त्तव्य-पथ, कर्त्तव्य-पथ!

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