करो सत्य संधान-उमेश शुक्ल -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Shukla

करो सत्य संधान-उमेश शुक्ल -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Shukla

विघ्नों से कब यहां डरा है कर्म योग का राही
राह में बाधा डाले जो बस उनकी शामत आई
सतयुग. त्रेता औ द्वापर सब इसके हैं साखी
कुटिल पात्र का हश्र वही ज्यों घृत में फंसा हो माखी
वेद पुराणों के तथ्यों से जो अनजान बेचारे
उनसे नैतिकता की आस जैसे दिन में तारे
कुटिल मित्र के संग से घटा कर्ण का मान
घोर विपत्ति काल में भूला वो सब अपने ज्ञान

कृपाचार्य और द्रोण की क्षीण हुई सब आभा
उनका ये अपराध था कि अन्याय का पथ अवराधा
ग्रंथ सभी यह बतला गए करो सत्य संधान
वर्ना न्यायी काल तुम्हारा करेगा काम तमाम

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