करै दुहकरम दिखावै होरु-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

करै दुहकरम दिखावै होरु-शब्द -गुरू अर्जन देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Arjan Dev Ji

करै दुहकरम दिखावै होरु ॥
राम की दरगह बाधा चोरु ॥१॥
रामु रमै सोई रामाणा ॥
जलि थलि महीअलि एकु समाणा ॥१॥ रहाउ ॥
अंतरि बिखु मुखि अम्रितु सुणावै ॥
जम पुरि बाधा चोटा खावै ॥२॥
अनिक पड़दे महि कमावै विकार ॥
खिन महि प्रगट होहि संसार ॥३॥
अंतरि साचि नामि रसि राता ॥
नानक तिसु किरपालु बिधाता ॥4॥71॥140॥194॥

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