करतार की सौगन्द है-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

करतार की सौगन्द है-गंज-ए-शहीदां -अल्लाह यार ख़ां -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Allah Yar Khan Jogi ,

करतार की सौगन्द है, नानक की कसम है ।
जितनी भी हो गोबिन्द की तार्रीफ़ वुह कम है ।
हरचन्द मेरे हाथ में पुर ज़ोर कलम है ।
सतिगुर के लिखूं, वसफ़, कहां ताबे-रकम है ।
इक आंख से क्या, बुलबुला कुल बहर को देखे !
साहिल को, या मंझधार को, या लहर को देखे !

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