कमरि कटारा बंकुड़ा बंके का असवारु-सलोक-गुरु नानक देव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Guru Nanak Dev Ji

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कमरि कटारा बंकुड़ा बंके का असवारु ॥
गरबु न कीजै नानका मतु सिरि आवै भारु ॥३॥(956)॥

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