कमनीय कामना छप्पै -पवित्र पर्व -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

कमनीय कामना छप्पै -पवित्र पर्व -अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’’-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh,

करदे सरस वसंत मलय मारुत आमोदित।
कोकिल पुलकित विपुल मंजरी परम प्रमोदित।
लोचन को सुख निलय कलित किसलय कर लेवे।
विकच कुसुम चय प्रचुर बिकचता चित को देवे।
मानस में रसिक समूह के दे रस अति रमणीय भर।
सरसित विकसित विलसित लताफलित पल्लवित तरु निकर।1।

हो गुलाल से लाल बदन लालिमा बढ़ावें।
खेल खेल कर रंग जाति रँग में रँग जावें।
चला कुमकुमे चलें कुमक ले हित चावों से।
भर अबीर से भरें वीरता के भावों से।
मिल सुमति मानवी से गले कुमति दानवी को दहें।
रज से आरंजित भाल कर देश राग रंजित रहें।2।

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