कभी सोचा है-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

कभी सोचा है-कविता-प्रफुल्ल सिंह “बेचैन कलम” -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Praful Singh “Bechain Kalam”

 

कभी सोचा है गहराई से
आख़िर क्यों…?
न चाहते हुए भी
तुम बार – बार
अकेलेपन से घिर जाते हो
वजह दो ही है ,
तुमने ग़लत लोगों को
मन का सिहांसन
और अच्छे लोगों को
वहम् की कुटिया दे रखी है..!

 

Leave a Reply