कब ग़ैर ने ये सितम सहे चुप-ग़ज़लें-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

कब ग़ैर ने ये सितम सहे चुप-ग़ज़लें-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

कब ग़ैर ने ये सितम सहे चुप
ऐसे थे हमें जो हो रहे चुप

शिकवा तो करें हम उस से अक्सर
पर क्या करें दिल ही जब कहे चुप

सुन शोर गली में अपनी हर दम
बोला कभी तुम न याँ रहे चुप

सोचो तो कभी चमन में ऐ जाँ
बुलबुल ने किए हैं चहचहे चुप

जब हम ने कहा ‘नज़ीर’ इस से
हम रहने के याँ नहीं गहे चुप

Leave a Reply