कबहू खीरि खाड घीउ न भावै-भैरउ बाणी नामदेउ जीउ की ੴ सतिगुर प्रसादि -शब्द (गुरू ग्रंथ साहिब) -संत नामदेव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sant Namdev Ji

कबहू खीरि खाड घीउ न भावै-भैरउ बाणी नामदेउ जीउ की
ੴ सतिगुर प्रसादि -शब्द (गुरू ग्रंथ साहिब) -संत नामदेव जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Sant Namdev Ji

कबहू खीरि खाड घीउ न भावै ॥
कबहू घर घर टूक मगावै ॥
कबहू कूरनु चने बिनावै ॥1॥

जिउ रामु राखै तिउ रहीऐ रे भाई ॥
हरि की महिमा किछु कथनु न जाई ॥1॥रहाउ॥

कबहू तुरे तुरंग नचावै ॥
कबहू पाइ पनहीओ न पावै ॥2॥

कबहू खाट सुपेदी सुवावै ॥
कबहू भूमि पैआरु न पावै ॥3॥

भनति नामदेउ इकु नामु निसतारै ॥
जिह गुरु मिलै तिह पारि उतारै ॥4॥5॥1164॥

 

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