कत जाईऐ रे घर लागो रंगु-शब्द-भक्त रामानन्द जी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhakt Ramanand Ji

कत जाईऐ रे घर लागो रंगु-शब्द-भक्त रामानन्द जी -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhakt Ramanand Ji

रामानंद जी घरु १ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
कत जाईऐ रे घर लागो रंगु ॥
मेरा चितु न चलै मनु भइओ पंगु ॥१॥ रहाउ ॥
एक दिवस मन भई उमंग ॥
घसि चंदन चोआ बहु सुगंध ॥
पूजन चाली ब्रहम ठाइ ॥
सो ब्रहमु बताइओ गुर मन ही माहि ॥१॥
जहा जाईऐ तह जल पखान ॥
तू पूरि रहिओ है सभ समान ॥
बेद पुरान सभ देखे जोइ ॥
ऊहां तउ जाईऐ जउ ईहां न होइ ॥२॥
सतिगुर मै बलिहारी तोर ॥
जिनि सकल बिकल भ्रम काटे मोर ॥
रामानंद सुआमी रमत ब्रहम ॥
गुर का सबदु काटै कोटि करम ॥੩॥੧॥1195॥
(गुरू ग्रंथ साहिब)

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