कज्जल छंद “समय का हेर-फेर”-शुचिता अग्रवाल शुचिसंदीप -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Suchita Agarwal Suchisandeep 

कज्जल छंद “समय का हेर-फेर”-शुचिता अग्रवाल शुचिसंदीप -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Suchita Agarwal Suchisandeep

 

समय-समय का हेर-फेर,
आज सेर कल सवा सेर।
जग में चलती एक रीत,
जाय अँधेरी रात बीत।

रहना छोड़ो अस्त-व्यस्त,
जीवन करलो खूब मस्त।
प्यारे सब में देख प्रीत,
गाओ मन से प्रेम गीत।

दुख का आता एक मोड़,
सुख जब जाता हाथ छोड़।
हँसना-रोना साथ-साथ,
डोर जगत की राम हाथ।

रखना मन में खूब जोश,
किंतु न खोना कभी होश।
छोड़ समय पर जीत-हार,
सब बातों का यही सार।
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कज्जल छंद विधान-

यह 14 मात्राओं का सम मात्रिक छंद है।
दो दो चरण या चारों चरण समतुकांत होते हैं।

इसका मात्रा विन्यास निम्न है-
अठकल+त्रिकल+गुरु और लघु=14 मात्राएँ।
(अठकल दो चौकल या 3-3-2 हो सकता है,
त्रिकल 21, 12, 111 हो सकता है तथा
द्विकल 2 या 11 हो सकता है।)

 

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