कई दिन से हम भी हैं देखे उसे हम पे नाज़ ओ इताब है-ग़ज़लें-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

कई दिन से हम भी हैं देखे उसे हम पे नाज़ ओ इताब है-ग़ज़लें-नज़ीर अकबराबादी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nazeer Akbarabadi

कई दिन से हम भी हैं देखे उसे हम पे नाज़ ओ इताब है
कभी मुँह बना कभी रुख़ फिरा कभी चीं-जबीं पे शिताब है

है फँसा जो ज़ुल्फ़ में उस के दिल तो बता दें क्या तुझे हम-नशीं
कभी बल से बल कभी ख़म से ख़म कभी ताब-चीन से ताब है

वो ख़फ़ा जो हम से है ग़ुंचा-लब तो हमारी शक्ल ये है कि अब
कभी रंज-ए-दिल कभी आह-ए-जाँ कभी चश्म-ए-ग़म से पुर-आब है

नहीं आता वो जो इधर ज़रा हमीं इंतिज़ार में उस के याँ
कभी झाँकना कभी ताकना कभी बे-कली पए-ख़्वाब है

वो नज़ीर हम से जो आ मिला तो फिर उस घड़ी से ये ऐश हैं
कभी रुख़ पे रुख़ कभी लब पे लब कभी साग़र-ए-मय-ए-नाब है

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