औरतें कुछ परिभाषाएँ-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

औरतें कुछ परिभाषाएँ-कविता-पीयूष पाचक-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Piyush Pachak

लुगाई का लोग
कर्मों का भोग
लोग की लुगाई
समझो मुसीबत आई,

पति की पत्नी
पर कतरनी,
पत्नी का पति
मारी गई मति

हजबैंड की वाइफ
टेंशन में लाइफ़
वाइफ का हज़बैण्ड,
बेलन से बाजे बैंड,

सजनी का साजन
बना कोपभाजन,
साजन की सजनी
मनभर वजनी

गुलाम की जोरू
बड़ी कानफोडू
जोरू का गुलाम
समझो काम तमाम

कविता खतम
राम-राम।

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