ओ मारिया, ओ मारिया-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

ओ मारिया, ओ मारिया-ग़ज़लें व फ़िल्मी गीत-जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

ओ मारिया, ओ मारिया, ओ मारिया ओ हो ओ
ओ मारिया, ओ मारिया, ओ मारिया हो हो हो हो
जॉनी जब बोला था तुझसे शादी करेगी मुझसे
कैसे कहा था ये बता
ओ मारिया, ओ मारिया …

जॉनी की बातों से दिल धड़का तो होगा
शोला था तन मन में एक भड़का तो होगा
ओ मारिया, ओ मारिया …

ओ माई डार्लिंग कह के क्या गले लगाया था
क्या बोली थी तू जब वो पास आया था,
मम्मी से पूछूँगी, क्या ऐसा बोली थी
ओ मारिया, ओ मारिया …

खोई हुई थी जब तू जॉनी की बातों में
सर्दी के दिन थे य गर्मी की रातें?
थामा हाथ भी था क्या, अपने हाथों में
ओ मारिया, ओ मारिया …

(सागर)

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