ओ बादर कारे-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

ओ बादर कारे-दर्द दिया है-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

ओ बादर कारे !

घुमड़-घुमड़ पल-पल छिन-छिन में,
बरसो मत मेरे आँगन मेँ,
सावन आज बने खुद मेरे नयना मतवारे !

ओ बादर कारे !

सुन-सुन गरज-गुहार तुम्हारी,
कंप-कंप उठती सेज-अटारी,
चौंक-चौंक पड़ते हैं सुधि के सपने निंद्रियारे!
ओ बादर कारे !

वैसे ही काली निशि मेरी,
घोल रहे तुम और अंधेरी,
डर है डूब न जायँ सदा को नभ के सब तारे!
ओ बादर कारे !

जाने कहाँ-कहाँ का जल भर,
तृण-तृण पर झरते तुम झर-झर
आज तनिक उनकी पलकों पर-
जाकर बरसा दो मेरे भी दो आँसू खारे!
ओ बादर कारे !

देख जिन्हें शायद उन्मन बन,
क्षणभर यह सोचे उसका मन,
इसी तरह गल-ढलकर निशि-दिन-
उन बिन कोई प्राण देह बस बूँदों की धारे!
ओ बादर कारे !

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