ओहरे ताल मिले नदी के जल में-इंदीवर -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Indeevar

ओहरे ताल मिले नदी के जल में-इंदीवर -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Indeevar

ओहरे ताल मिले नदी के जल में
नदी मिले सागर में
सागर मिले कौनसे जल में?
कोई जाने ना
ओहरे ताल मिले नदी के जल में
नदी मिले सागर में

सूरज को धरती तरसे
धरती को चंद्रमा
पानी में सीप जैसे
प्यासी हर आत्मा
प्यासी हर आत्मा
ओ मित्वा रे ए ए ए
पानी में सीप जैसे
प्यासी हर आत्मा
बूंद छुपी किस बादल में
कोई जाने ना
ओहरे ताल मिले नदी के जल में
नदी मिले सागर में
सागर मिले कौनसे जल में?
कोई जाने ना
ओहरे ताल मिले नदी के जल में

अंजाने होठो पर क्यू?
पहचाने गीत है
पहचाने गीत है
कल तक जो बेगाने थे
जन्मों के मीत है
जन्मों के मीत है
ओ मित्वा रे ए ए ए
कल तक जो बेगाने थे
जन्मों के मीत है
क्या होगा कौनसे पल में?
कोई जाने ना
ओहरे ताल मिले नदी के जल में
नदी मिले सागर में
सागर मिले कौनसे जल में?
कोई जाने ना
ओहरे ताल मिले नदी के जल में

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