ऐ मेरे देश के वीर बाँके सुअन-कविता-रामेश्वर नाथ मिश्र ‘अनुरोध’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rameshwar Nath Mishra Anurodh 

ऐ मेरे देश के वीर बाँके सुअन-कविता-रामेश्वर नाथ मिश्र ‘अनुरोध’ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rameshwar Nath Mishra Anurodh

 

ऐ मेरे देश के वीर बाँके सुअन !
है नमन्, है नमन्, है नमन्, है नमन् ।
बाढ़ आयी तो तुम भिड़ गये बाढ़ से,
अंधड़ों में तुम्हीं ने सम्भाला हमें ।
भूमि काँपी या ज्वालामुखी जब फटे
आग से भी तुम्हीं ने निकाला हमें ।।
लौहमय हे पुरुष ! तुम विहँसते चले,
हर घड़ी सीस पर बाँध अपना कफन ।
गिरि हिमालय की हिम से ढँकी चोटियाँ
मुस्कुरातीं तुम्हारे चरण चूमकर ।
घाटियों, मरुथलों, बीहड़ों, बंजरों,
सागरों ने बुलाया तुम्हें झूमकर ।।
जान अपनी हथेली पर रखकर सदा
तुम लुटाते रहे हर घड़ी नौरतन ।
शत्रु जब भी चढ़ा तुमने तोड़ी कमर,
जीत करती रही बस तुम्हारा वरण ।
आत्मरक्षा में आयुध तुम्हारे उठे
रण का तुमने बताया नया व्याकरण ।।

स्वर्ग – सा है सुरक्षित हमारा वतन ।
है नमन्, है नमन्, है नमन्, है नमन् ।

 

This Post Has One Comment

Leave a Reply