ऐ आजादी के जश्न में-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

ऐ आजादी के जश्न में-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

ऐ आजादी के जश्न में,
डूबे बच्चों को देखा है ।
होठों से मुस्कान बिखेरे,
हाथों में तिरंगा देखा है ।।

पर मैंले कपड़े उसके हैं,
फटे हैं मन में मैल नहीं ।
दिल मे ईर्ष्या दोष रखने वालों को,
उस बालक को तिरंगा बेचते देखा है।।

ऐ आजादी के जश्न में,
डूबे बच्चों को देखा है।
होठों से मुस्कान बिखेरे,
हाथों में तिरंगा देखा है।।

जो बिक जाता खुश हो जाता,
आजादी का भान नहीं ।
एक मां का जश्न कैसे मनाएं
एक मॉ उसकी बीमार रही ।

खिलौनौ से खेलने की उम्र में,
उसे खिलौने बेचते देखा है।।

ऐ आजादी के जश्न में
डूबे बच्चों को देखा है ।
होठों से मुस्कान बिखेरे,
हाथों में तिरंगा देखा है

एक माँ का तुमने जश्न मनाया ।
उसी तिरंगे को सड़कों पे बहाया
तुम अच्छे कि वो अच्छा था,
जिसको धरती मां की आचँल में ।

अपनी गोद से मॉ का सिर टिकाये,
दवा पिलाकर रोते हुये देखा है।।

ऐ आजादी के जश्न में,
डूबे बच्चों को देखा है ।
होठों से मुस्कान बिखेरे,
हाथों में तिरंगा देखा है।।

 

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