ऐसे भी क्षण आते-बादर बरस गयो-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

ऐसे भी क्षण आते-बादर बरस गयो-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

अरे! ऐसे भी क्षण आते।

प्राण-व्यथा जिसको रो-रो कर,
हम चाहते सुनाना क्षण-भर,
जाकर पर उसके सम्मुख ही
रोते रोते हम सहसा मुस्काने लग जाते।
अरे! ऐसे भी क्षण आते।।

पागल हो तलाश में जिसकी,
हम खुद बन जाते रज मग की,
किन्तु प्राप्ति की व्याकुलता में
कभी-कभी हम मंज़िल से भी जागे बढ़ जाते।
अरे! ऐसे भी क्षण आते।।

जिसकी पूजा जीवन की गति,
पथ-पाथेय मधुर जिसकी स्मृति,
मचल उसी आराध्य से कभी
हम अपनी ही पूजा करवाने को अकुलाते।
अरे! ऐसे भी क्षण आते।।

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