ऐसा भी होगा-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

ऐसा भी होगा-त्रिकाल संध्या-भवानी प्रसाद मिश्र-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Bhawani Prasad Mishra

 

इच्छाएँ उमडती हैं
तो थक जाता हूँ,
कभी एकाध इच्छा
थोडा चलकर
तुम्हारे सिरहाने रख जाता हूँ।
जब तुम्हारी आंख
खुलती है,
तो तुम उसे देखकर
सोचती हो,
यह कोई चीज-
तुम्हारी इच्छा से
मिलती-जुलती है।
कभी ऐसा भी होगा?
जबमेरी क्लांति,
कोई भी इच्छातुम्हारे सिरहाने तक रखने
नहीं जाएगी,
तब,
वहां के खालीपन को देखकर,
शायद तुम्हें याद आएगी
अपनी इच्छा से मिलती-जुलती मेरी किसी इच्छा की।

 

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