एह सुन बचन जुगीसरां मार किलक बहु रूप उठाई ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

एह सुन बचन जुगीसरां मार किलक बहु रूप उठाई ॥-बाबे नानक देव जी दी वार-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

एह सुन बचन जुगीसरां मार किलक बहु रूप उठाई ॥
खट दरशन कउ खेद्या कलिजुग बेदी नानक आई ॥
सिध बोलन सभ अउखधियां तंत्र मंत्र की धुनो चड़्हाई ॥
रूप वटायआ जोगियां सिंघ बाघ बहु चलित दिखाई ॥
इक पर करके उडरन पंखी जिवें रहे लीलाई ॥
इक नाग होइ पवन छोड इकना वरखा अगन वसाई ॥
तारे तोड़े भंग्रनाथ इक चड़ मिरगानी जल तर जाई ॥
सिधां अगन न बुझे बुझाई ॥41॥

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