एतेराफ़-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar 

एतेराफ़-लावा -जावेद अख़्तर-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Javed Akhtar

सच तो ये है क़ुसूर अपना है
चाँद को छूने की तमन्ना की
आस्मां को ज़मीन पर माँगा
फूल चाहा कि पत्थरों पे खिले
काँटों में की तलाश ख़ुशबू की
आग से माँगते रहे ठंडक
ख्वाब जो देखा
चाहा सच हो जाए
इसकी हमको सज़ा तो मिलनी थी ।

Leave a Reply