एक साद्धर्म्य-आवाज़ों के घेरे -दुष्यंत कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dushyant Kumar

एक साद्धर्म्य-आवाज़ों के घेरे -दुष्यंत कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dushyant Kumar

मुझे बतलाओ
कि क्या ये जलाशय
मेरे हृदय की वेदना का नहीं है प्रतिरूप ?
मेरे ही विकल व्यक्तित्व की सुधियाँ नहीं
तट पर खड़ी तरु-पाँति ?
और ये लहरें तड़पती जो कि प्रतिपल
क्या नहीं तट के नियन्त्रण में बँधी इस भाँति ?
ज्यों परिस्थिति से बँधे हम विवश और विफल ।

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