एक लड़का-नज़्में-इब्न-ए-इंशा -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ibn-e-Insha

एक लड़का-नज़्में-इब्न-ए-इंशा -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Ibn-e-Insha

एक छोटा सा लड़का था मैं जिन दिनों
एक मेले में पहुँचा हुमकता हुआ
जी मचलता था एक एक शय पर
जैब ख़ाली थी कुछ मोल ले न सका
लौट आया लिए हसरतें सैंकड़ों
एक छोटा सा लड़का था मैं जिन दिनों

ख़ैर महरूमियों के वो दिन तो गए
आज मेला लगा है उसी शान से
आज चाहूँ तो इक इक दुकाँ मोल लूँ
आज चाहूँ तो सारा जहाँ मोल लूँ
ना-रसाई का अब जी में धड़का कहाँ
पर वो छोटा सा अल्हड़ सा लड़का कहाँ

 

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