एक मुस्कुराहट-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

एक मुस्कुराहट-खोया हुआ सा कुछ -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

चमकते बत्तीस मोतियोंवाली मुस्कुराहट
खुला हुआ बादबान जैसे
धुला हुआ आसमान जैसे
सहर की पहली अज़ान जैसे

पता नहीं
नाम क्‍या है उसका
ख़बर नहीं काम क्‍या है उसका

वो ठीक छे बज के बीस की
एक जगमगाहट
उतर के होठों से
यूँ मेरे साथ चल रही है
न छाँव कुछ कम है
रास्तों में
न धूप ज़्यादा निकल रही है

मैं जिस तरह
सोचता था
बस्ती उसी तरह से बदल रही है

ये इक सितारा
जो मेरी आँखों में
देर से झिलमिला रहा है
उसे…
समुन्दर बुला रहा है

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