एक मनु आठ खंड खंड पांच टूक-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

एक मनु आठ खंड खंड पांच टूक-कबित्त-भाई गुरदास जी-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Bhai Gurdas Ji

एक मनु आठ खंड खंड पांच टूक
टूक टूक चारि फार फार दोइ फार है ।
ताहू ते पईसे अउ पईसा एक पांच टांक
टांक टांक मासे चारि अनिक प्रकार है ।
मासा एक आठ रती रती आठ चावर की
हाट हाट कनु कनु तोल तुलाधार है ।
पुर पुर पूरि रहे सकल संसार बिखै
बसि आवै कैसे जाको एतो बिसथार है ॥२२९॥

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