एक नील उपलब्धि-असमिया कविता-नीलमणि फूकन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nilmani Phookan

एक नील उपलब्धि-असमिया कविता-नीलमणि फूकन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nilmani Phookan

 

उस विस्तृत शिलामय प्रान्त में दबा हुआ है
सबसे कोमल स्वर में गीत गाने वाला वो आदमी
हरे-भरे खेतों के बीच से अपने हाथों को लहराता हुआ वो
अब हमारे सर के ऊपर छाया बनने नहीं आएगा,
राजहंस बनकर पानी में खेलती हुई परियों से छीनकर
अब वो प्रकाश जैसी परम आयु हमारे लिए नहीं लाएगा।
गले में फंदे डालकर झूलती हुई औरत की तरह
अब उसकी आवाज़ की स्तब्धता में टुकड़े-टुकड़े होकर
टूट जाता है एक विशाल अन्धकार दर्पण
हम सभी की भावनाओं के प्राणों पर,
लोगों से भरपूर कस्बों और शहरों तक बहती हवा के हर झोंके पर।
सबसे कोमल स्वर में गीत गाने वाला वो आदमी
अलस्सुबह के सपनों की तरह उसकी आवाज़,
उसके गीतों के हर चाँद और सूरज
लाल फलों वाली झाड़ियों का हर पौधा
अब हमारे अस्तित्व के अँधेरे गर्भ में
एक नील उपलब्धि है।

 

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