एक दीप मेरा-कविता-पूर्णिमा वर्मन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Purnima Varman

एक दीप मेरा-कविता-पूर्णिमा वर्मन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Purnima Varman

दुनिया के
मेले में एक दीप मेरा
ढेर से धुँधलके में ढूँढता सवेरा

वंदन अभिनंदन में
खोया उजियारा
उत्सव के मंडप में
आभिजात्य सारा
भरा रहा शहर रौशनी से हमारा
मन में पर छिपा रहा
जूना अँधियारा

जिसने
अँधियारे का साफ़ किया डेरा
जिसने उजियारे का रंग वहाँ फेरा
एक दीप मेरा

सड़कों पर
भीड़ बहुत सूना गलियारा
अँजुरी भर पंचामृत
बाकी जल खारा
सप्त सुर तीन ग्राम अपना इकतारा
छोटे से मंदिर का
ज्योतित चौबारा

जिसने
कल्याण तीव्र मध्यम में टेरा
जिससे इन साँसों पर चैन का बसेरा
एक दीप मेरा

Leave a Reply