एक दिन धरती पर हो गया-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

एक दिन धरती पर हो गया-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

एक दिन धरती पर हो गया बड़ा झोल।
जब एक बाबा को नेता ने दिया अहम रोल ।

उसने सबसे अलग निति बनाई।
फिर भोले भक्तो को पठ्ठी पढ़ाई।
बोला मरने से पहले रजिस्ट्रेशन कराए जाते हैं।
पहले मरो फिर स्वर्ग में सीट दिलाए जाते है।।

यह सुनते ही स्वर्ग की बुकिंग शुरू हो गई।
इधर इन्द्र के ऊपर परेशानी खड़ी हो गई।
जब एक नेता ने इन्द्रासन मांग लिया।
पैसा मिलते ही बाबा ने निद्रासन साध लिया।

ध्यान साधने में हो गया बड़ा झोलम झोल।
जब बाबा को नेता ने दे दिया अहम रोल।।

फिर बाबा ने राज महल बनवाया।
टीवी पर मोक्ष दिलाने का विज्ञापन चलवाया।
एक लाख में स्वर्ग का दाम तय हो गया।
पैसा मिलते ही भजन अंग्रेजी मय हो गया।

कुछ दिन बाद नेता धरती से टपके।
थोड़ी देर में यमराज के पास पहुंचे।
बोले हमने स्वर्ग की सीट बुक कराई है।
जल्दी कुर्सी दे दो इसी में तुम्हारी भलाई है।

हक्के बक्के यमराज का आसन गया डोल।
जब एक बाबा को नेता ने दे दिया अहम रोल।

चित्रगुप्त ने पूरा काला चिट्ठा दिखाया।
यमराज ने नेता पर हंटर बरसाया।
तब नेता को अक्ल आई।
फिर उसने चित्रगुप्त को पठ्ठी पढ़ाई।

बोला कम से कम सेवा का अवसर दीजिए।
बहीखाता हम देखें आप मौज कीजिए।
ऊबे बैठे चित्र गुप्त फौरन मान गये।
नेता के बहीखाता सम्भालते बाबा स्वर्ग सिधार गये।

बोला तुम्हें स्वर्ग में न पाकर कर दिया ये खेल।
जब एक बाबा को नेता ने दे दिया अहम रोल।

धरती पर हम चेले थे तुम हमारे चेले बनो।
डंडा खाने से पहले अच्छे से तेल मलो।
स्वर्ग की सीट तुम्हारा इंतज़ार कर रही है।
सर से पांव तक अच्छे से हवादार कर रही है।

बस अंतर ये है
कि पहले अपनी बात मनवाने के लिए
गोली चलानी पड़ती थी।
अब पावर मे है तो कलम चलानी पड़ती है।
जो तुम जैसे बाबा को पैदा करके मिटा सकता है।
वो स्वर्ग से दोबारा धरती पर भी जा सकता है।।

अब इससे बड़ा नहीं हो सकता बड़ा झोल।
एक नेता कैसे कैसे खेल जाता है खेल।।

 

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