एक दिन देखा जब उनको-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

एक दिन देखा जब उनको-कविता -दीपक सिंह-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Deepak Singh

 

एक दिन देखा जब उनको,
नदियों का बेग मोड़ने आये ।
पहले नदियां सूखी कर दी,
फिर नदियों को सींचने आए ।।

फिर वो पानी न चढ़ा मन पर,
जिसने कभी डुबाया था
वक्त ने ऐसी पलटी मारी,
सीखे कौन पराया था
उनकी वो आह्लादित बोली,
वो नजरों से राज खोलने आए ।।

एक दिन देखा जब उनको,
नदियों का बेग मोड़ने आये।
पहले नदियां सूखी कर दी,
फिर नदियों को सींचने आए ।।

जो हमको ईमानदारी सिखलाते,
खुद उनका ईमान ईमान न था
पर फिर भी ईमानदारी सीखी हमने,
हर झूठ को सच से मिटाने आए ।।

एक दिन देखा जब उनको,
नदियों का बेग मोड़ने आए।
पहले नदियां सूखी कर दी,
फिर नदियों को सींचने आए।।

वक्त ने उनको वो वक्त दिखाया,
जिस वक्त की फरियाद न थी
वक्त ने हर समझौता करवाया,
जिस वक्त से हमको आस न थी
वक़्त से सीखो हे मुसाफिर,
खुद वक्त ही वक्त को लेने आए ।।

एक दिन देखा जब उनको,
नदियों का बेग मोड़ने आए ।
पहले नदियां सूखी कर दी,
फिर नदियों को सीखने आए।।

 

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