एक चुनाव-परिणाम -जलते हुए वन का वसन्त-खण्ड दो-दुष्यंत कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dushyant Kumar 

एक चुनाव-परिणाम -जलते हुए वन का वसन्त-खण्ड दो-दुष्यंत कुमार-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dushyant Kumar

 

आओ देखें-
एक छोटी-सी पगडंडी
कहाँ पहुंच सकती है !
भय की ज़मीन पर
निश्चय की ईंट
कैसे एक सृष्टि रच सकती है ?

आओ सोचें-
कैसे घरों में बंद विद्रोह के तर्क
बाहर आ जाते हैं,
और लोकतंत्र के समर्थन में
सफल वातावरण बनाते हैं।

आओ, अंजलि में भर लें-
पराजित लहरों के मुँह से निकलता हुआ झाग ।
देखें–
लौह-पुरुष बनकर पुजने वाला पुतला
मोम का निकला।
एक फूंक से बुझ गया
सूरज समझा जाने वाला चिराग़।

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