एक चिड़िया-नज़्में -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

एक चिड़िया-नज़्में -निदा फ़ाज़ली-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Nida Fazli

जामुन की इक शाख़ पे बैठी इक चिड़िया
हरे हरे पत्तों में छप कर गाती है
नन्हे नन्हे तीर चलाए जाती है
और फिर अपने आप ही कुछ उकताई सी
चूँ चूँ करती पर तोले उड़ जाती है
धुँदला धुँदला दाग़ सा बनती जाती है
मैं अपने आँगन में खोया खोया सा
आहिस्ता आहिस्ता घुलता जाता हूँ
किसी परिंदे के पर सा लहराता हूँ
दूर गगन की उजयाली पेशानी पर
धुँदला धुँदला दाग़ सा बनता जाता हूँ

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