एक गीत और कहो-कविता-पूर्णिमा वर्मन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Purnima Varman

एक गीत और कहो-कविता-पूर्णिमा वर्मन-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Purnima Varman

सरसों के रंग सा
महुए की गंध सा
एक गीत और कहो
मौसमी वसंत का।

होठों पर आने दो रुके हुए बोल
रंगों में बसने दो याद के हिंदोल
अलकों में झरने दो गहराती शाम
झील में पिघलने दो प्यार के पैगाम

अपनों के संग सा
बहती उमंग सा
एक गीत और कहो
मौसमी वसंत का।

मलयानिल झोंकों में डूबते दलान
केसरिया होने दो बाँह के सिवान
अंगों में खिलने दो टेसू के फूल
साँसों तक बहने दो रेशमी दुकूल

तितली के रंग सा
उड़ती पतंग सा
एक गीत और कहो
मौसमी वसंत का।

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