एक उम्र-प्यार के सौजन्य से-परिवेश : हम-तुम-कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan 

एक उम्र-प्यार के सौजन्य से-परिवेश : हम-तुम-कुँवर नारायण-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kunwar Narayan

एक उम्र खुला की
भर भर के ढला की,

एक प्यास
नशा खास पीने में।

एक उम्र बला की
बातों में टला की,

एक रात
साथ साथ जीने में।

बहुत दिनों खला की
बुझ बुझकर जला की,

एक आग
जाग जाग सीने में।

इंच इंच, साँस साँस, नपी-तुली ज़िन्दगी,
एक ख्वाब-बेहिसाब ख़र्च हुई ज़िन्दगी।

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