एक अल्पविराम गया, आगे तो विजन है मन-अल्पविराम-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal 

एक अल्पविराम गया, आगे तो विजन है मन-अल्पविराम-राजगोपाल -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajagopal

पुराने पृष्ठों पर आज धूल जमी
उन पर बिछे शब्दों की पंक्तियाँ थमी
ऊंची थी कल्पना,पर हुयी आभास की कमी
अधूरी रही कहानी, अब न बचे हैं और क्षण
एक अल्पविराम गया, आगे तो विजन है मन

शब्दों पर मिट्टी पड़ी छू कर निर्मोही मुख
न स्मृतियाँ रही, न ही शेष रहा मुट्ठी भर सुख
प्रणय की लकीर फिर खींच जाता उसका दुख
मधुबाला के छंदों मे अब न रहा कोई आकर्षण
एक अल्पविराम गया, आगे तो विजन है मन

जीवन का यह पृष्ट फाड़ दे मन
न अतीत रहा, न वर्तमान, घिरा है ग्रहण
न प्रेयसी रही, न प्रणय रहा,न होगा और सहन
जीत कर यह जीवन, कर ले अब मन परिवर्तन
एक अल्पविराम गया, आगे तो विजन है मन

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