उसे हमने बहुत ढूँढा न पाया-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq 

उसे हमने बहुत ढूँढा न पाया-ज़ौक़ -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Zauq

उसे हमने बहुत ढूँढा न पाया
अगर पाया तो खोज अपना न पाया

जिस इन्साँ को सगे-दुनिया न पाया
फ़रिश्ता उसका हमपाया न पाया

मुक़द्दर से ही गर सूदो-ज़ियाँ है
तो हमने याँ न कुछ खोया न पाया

अहाते से फ़लक़ के हम तो कब के
निकल जाते मगर रस्ता न पाया

जहाँ देखा किसी के साथ देखा
कहीं हमने तुझे तन्हा न पाया

किया हमने सलामे-इश्क़ तुझको!
कि अपना हौसला इतना न पाया

न मारा तूने पूरा हाथ क़ातिल!
सितम में भी तुझे पूरा न पाया

लहद में भी तेरे मुज़तर ने आराम
ख़ुदा जाने कि पाया या न पाया

कहे क्या हाय ज़ख़्मे-दिल हमारा
ज़ेहन पाया लबे-गोया न पाया

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