उसी कमरे में- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi

उसी कमरे में- कविता -अब्दुर रहमान राही -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Abdur Rehman Rahi

 

उसी कमरे में
जहाँ मुझे इतने दिन गये
बिस्तर में ठंड झेलते
देखी मैंने दिन ढलते समय
नन्ही मुन्नी चुपचाप
सूर्य की एक किरण
द्वार की ओट में
सीमेंटी फ़र्श पर
कटे-फटे जूते के फुसफुसे फुन्दे
उजालते हुए
सेंडली काँटों के गर्द में अटे ढाँचे
जगमग जगमग होते।

(कश्मीरी से अनुवाद : सतीश विमल)

 

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