उम्मीद का छोर-राजकुमार जैन राजन -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajkumar Jain Rajan

उम्मीद का छोर-राजकुमार जैन राजन -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajkumar Jain Rajan

अहसासों को
अंजुली में भरकर
थामे रखने की कोशिश
हाथ से रेत की मानिंद फिसलती है

औरत- पुरुष के सम्बंध
रिश्तों की खूबसूरती
इस जहान की पूर्णता है
ये रिश्ते दुनिया में
सुगन्धित, शाश्वत माहौल
का सृजन करते हैं

आशा भरे सपने
संजोये औरत इस जहान में
उम्मीदों से भरी
आत्म सम्मान की अभिलाषा लिए
सर्वस्व समर्पण करती है
सृष्टि के लिए

मतलबी दुनिया
उसे देवी कह
बहलाती है, पूजती है
सृष्टि की सृजक के सम्मान से
नवाजती है
वही दुनिया
औरत के साथ
ख़ौफ़नाक हादसे करती है
तब मानवता शर्मसार हो
रोती है

आशा थी कि औरत को
उसका सही स्थान मिलेगा
उसकी बांहों में होगा आकाश सारा
बदलेगी उसकी भी तकदीर
एक दिन
आएगा सुनहरा दौर भी

मुक्कमल जहान पा भी लिया
पर कितनी कीमत चुकाती है वह
पल -पल
भूखे भेड़ियों से उस
पर टूटते है वही मनुज
जिन्हें वही तो जन्म देती है
अपनी कोख से

औरत को देवी नहीं
इंसान ही रहने दो
ताकि उसकी भावनाओं को
दबाया न जाये
मर्यादाओं की सख्त जंजीरों में
झकड़ा न जाये
उसे उड़ने को खुला आकाश दें
दे सकें तो उसे सही-गलत की तालीम दें

आज भी हम
औरत की उम्मीदो के
उस छोर से कितनी दूर हैं
उसकी हस्ती यही रही कि
वो अपनो पर मिट गई
पर अपनों ने उसको मिटा डाला।

नहीं, अब और नहीं….।

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