उमीदे-सहर की बात सुनो-शामे-श्हरे-यारां -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

उमीदे-सहर की बात सुनो-शामे-श्हरे-यारां -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़-Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Faiz Ahmed Faiz

जिगर-दरीदा हूं, चाके-जिगर की बात सुनो
अलम-रसीदा हूं, दामने-तर की बात सुनो

ज़बां-बुरीदा हूं, ज़ख़्मे-गुलू से हरफ़ करो
शिकसता-पा हूं, मलाले-सफ़र की बात सुनो

मुसाफ़िरे-रहे-सहरा-ए-ज़ुल्मते-शब से
अब इलतिफ़ाते-निगारे-सहर की बात सुनो

सहर की बात उमीदे-सहर की बात सुनो

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