उफ्फ़ उसकी नाराज़गी भी क्या कहर ढाती है-उत्साही उज्जवल -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Utsahi Ujjwal

उफ्फ़ उसकी नाराज़गी भी क्या कहर ढाती है-उत्साही उज्जवल -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Utsahi Ujjwal

उफ्फ़ उसकी नाराज़गी भी क्या कहर ढाती है
जब वो खुद ना आती तो उसकी यादें आ जाती है
कितना सितम इश्क़ में हमको देखो सहना पड़ता है
वो दूर होती है और आँखें हमारी नम हो आती है

 

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