उन शब्दों की तरह-किवाड़ _कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

उन शब्दों की तरह-किवाड़ _कविता संग्रह-कुमार अंबुज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Kumar Ambuj

 

जो आत्मीयजन देह की दुष्टता भुलाते हए
आत्मा की पवित्रता में विश्वास कर रहे हैं
खोज रहे हैं अमरता
वे सबसे भोले और सरल हैं

मुझे उन पर दया करना चाहिए
जो देह की खुशी में
नश्वरता के भय से शामिल हए
वे अनन्त पीड़ा के स्वामी बने
प्रसन्नता उनके जीवन में दुख की तरह
शरीक हुई

सिर्फ़ इच्छाएँ कभी प्रेम नहीं होती!

अन्तरिक्ष और अनन्त के बारे में
सबसे निश्चित यही है
कि वहाँ कोई अन्त नहीं होता
जो अन्त की खोज में हैं अनन्त कामनाओं के साथ
वे निरीह हैं

मुझे उन पर दया आना चाहिए

उन शब्दों की तरह
जो दुर्घटनाओं के बाद के ब्यौरे हैं।

1990

 

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