उनका शोषण होता है- अंतर्द्वंद्व एखलाक ग़ाज़ीपुरी-एखलाक ग़ाज़ीपुरी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Akhlaque Gazipuri

उनका शोषण होता है- अंतर्द्वंद्व एखलाक ग़ाज़ीपुरी-एखलाक ग़ाज़ीपुरी -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Akhlaque Gazipuri

सर्वाधिक अपमान वहीं जहाँ कन्या पूजन होता है
सीता राधा की धरती पर उनका शोषण होता है

पर निंदा के कारण वो वनवास को भेजी जाती है
हर पल उसके जीवन में इक अग्नि परीक्षा आती है
भरी सभा में बालों से वो खींच के लायी जाती है
यहाँ द्यूत में खुद की भार्या दाँव लगाई जाती है
अपनों के कारण नारी का अपमान प्रतिक्षण होता है
सीता राधा की धरती पर उनका शोषण होता है

सारे नाते तोड़ चली जो अपना संसार बसाने को
बाबुल का घर छोड़ दिया अपना घर बार बनाने को
रोकर जिसने पीहर छोड़ा अपना ससुराल हँसाने को
सात जनम की कसम उठाकर आ गई साथ निभाने को
दहेज की ख़ातिर उसपर भी जुल्म यहाँ पर होता है
सीता राधा की धरती पर उनका शोषण होता है

युगों युगों से दलित रही है नारी आज भी वैसी है
आदिम युग में जैसी थी अब भी बिल्कुल वैसी है
पढ़ी लिखी ये दुनियां देखे उसकी हालत कैसी है
आज भी कुचली जाती है वो पाँव की जूती जैसी है
अबला से व्यभिचार आज कल देखो क्षण क्षण होता है
सीता राधा की धरती पर उनका शोषण होता है

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