उनका पैगाम आया है-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

उनका पैगाम आया है-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

उनका पैगाम आया है….
सूने सूने कमरे ने ले अंगड़ाई
दीवारों की खामोशी तोड़ी है
बिखरी सांसो ने नए साज बना
धुन उनके आने की जोड़ी है
बुझा बैठी थी चौखट दीपो को
हवा ने फिर उनको जलाया है
लगता है उनका पैगाम आया है ।
हां फिर उनका पैगाम आया है ।।

उनका पैगाम आया है….
रात अंधेरी में दिवस मान सा
फैला उनका ही उजियारा है
जीत रहा मन जिसे ख्वाबो में
पलको पर उनसे ही हारा है
सजा कर एक तस्वीर सुनहरी
आखर हर पंक्ति में लाया है
लगता है उनका पैगाम आया है ।
हां फिर उनका पैगाम आया है ।।

उनका पैगाम आया है….
दरवाजे भी उसी पीर पुरानी ने
उत्सुकता में आकर खोले है
जिन जख्मो ने साधी थी चुप्पी
वो सहमे सहमे फिर बोले है
होठो पर दबा रहा जो किस्सा
आंखों ने भर भर वो गाया है
लगता है उनका पैगाम आया है ।
हां फिर उनका पैगाम आया है ।।

उनका पैगाम आया है….
शबनम सी बरसी है मोहब्बत
बेरूत की छलकी घटाओ से
बहक रहे है फिर दरख पुराने
यादो में लिपट कर हवाओ से
जर्रे जर्रे में रमी महक पुरानी
जैसे कोई नया गुलाब आया है ।
लगता है उनका पैगाम आया है ।
हां उनका पैगाम आया है ।।

उनका पैगाम आया है….
मायूसी में खोए दिल वीराने में
बरसो बाद कोई दस्तक हुई है
संभाले थी ये आंखे जो कबसे
अश्को में गिरती तस्वीर वही है
कांप रहे थे होठ वो नाम पढ़कर
जिसका खत मेरे नाम आया है ।
आज उनका पैगाम आया है
हां हां उनका पैगाम आया है ।।

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