उनका कहना है कि नीरज ये लड़कपन छोड़ो-गीतिका-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

उनका कहना है कि नीरज ये लड़कपन छोड़ो-गीतिका-गोपालदास नीरज-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Gopal Das Neeraj

उनका कहना है कि नीरज ये लड़कपन छोड़ो
सुख की छांव में चलो दर्द का दामन छोड़ो।

अब तो तितली के परों प’ भी है नज़र उनकी
अब मुनासिब है यही दोस्तो! गुलशन छोड़ो।

काव्य के मंच प’ करते हैं विदूषक अभिनय
तुमको अभिनय नहीं आता है तो ये फ़न छोड़ो।

तुम तो मुट्ठी में लिए बैठे हो सारा बाज़ार
ग़म के मारों के लिए कोई तो दामन छोड़ो।

जब से तुम आये यहाँ खून की बरसात हुई
अब तो कुछ रहम करो छोड़ो ये आंगन छोड़ो।

ज़ुल्म का दौर किसी तौर भी बदले न अगर
ज़ीस्त के वास्ते फिर ज़ीस्त का दामन छोड़ो।

Leave a Reply