उदास हूँ मैं-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

उदास हूँ मैं-उमेश दाधीच -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Umesh Dadhich

क्या करोगी
अगर कहूँ कि उदास हूँ मैं ?
चलो झूठ ही सही
बस इतना सा कह दो कि पास हूँ मैं ।।

बहुत दूर दरिया पार है गांव तेरा
हवाओ ने उलट दिया है बहाव मेरा
तू सूरज है तो मुझे पता है रात हूँ मैं ।
बस इतना सा कह दो कि पास हूँ मैं ।।

खामोश सांसो में सुन तेरा शौर है
बीता वक़्त तेरा मैं, तू मेरा हर दौर है
तू लब है अगर तो दबी हर बात हूँ मैं ।
बस इतना सा कह दो कि पास हूँ मैं ।।

क्यों दहलीज़ को तेरी इंतज़ार मेरा
क्यों छुपाती है सबसे नाम हरबार मेरा
तू रूह बने तो साया सा तेरे साथ हूँ मैं ।
बस इतना सा कह दो कि पास हूँ मैं ।।

तारो को बुलाकर मुझसे मिलना
दीये जलाकर मुझे तेरा वो खत लिखना
शायद उन्ही खतों की बुझी राख हूँ मैं ।
बस इतना सा कह दो कि पास हूँ मैं ।।

सजा रही हो दर नई महफ़िल के
सुनोगी कैसे मेरे गीत, किस्से मेरे दिल के
झुकाकर नज़रे बता देना कि खास हूँ मैं ।
चलो झूठ ही सही
बस इतना सा कह दो कि पास हूँ मैं ।।
क्या करोगी
अगर कहूँ कि उदास हूँ मैं ?

Leave a Reply