उदास शहर-राजकुमार जैन राजन -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajkumar Jain Rajan

उदास शहर-राजकुमार जैन राजन -Hindi Poetry-कविता-Hindi Poem | Kavita Rajkumar Jain Rajan

याद है मुझे
वह खुशहाल दिन
डाल दिये गए
मेरे जीवन की गुल्लक में
शुभकामनाओं के
खनकते सिक्के
और बांटते रहे
हर पल हंसी
जिसमे खोजनी है मुझे
संवाद की पगडंडियां
इस विकल्पहीन समय में
उदास पड़े शहर में
हर तरफ छिड़ी है
अस्तित्व की जंग
पता नहीं
शब्द क्यों मौन हो गए
शीशे के घरों में रहने वाले भी
पत्थर की जुबान हो गए
कितनी खाली -खाली
हो गई आत्मा
रची जाती हरदम साजिशें
घोल दिया जाता
अफवाहों का जहर
जैसे पड़ जाते हैं
उसकी रूह में छाले
शुभकामनाओं का
भार ढ़ोते
बांटते रहे
तजुर्बों के इश्तिहार
सद्भावना और संवेदनाओं से
देते रहे एक सम्बोधन नया
विश्वास, प्रेम, सहिष्णुता
बिंधते रहे गीत प्यार का
उदास शहर के
अभिशापित प्रहरी
उड़ चले परिंदों से
सुना है शहर फिर से
मुस्करा रहा है।

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