उदास मैं-ठण्डा लोहा व कविता-धर्मवीर भारती-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dharamvir Bharati 

उदास मैं-ठण्डा लोहा व कविता-धर्मवीर भारती-Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Dharamvir Bharati

उन्मन मन पर एक अजब-सा अलस उदासी भार !

मुन्दती पलकों के कूलों पर जल-बूंदों का शोर
मन में उठती गुपचुप पुरवैया की मृदुल हिलोर
कि स्मृतियां होतीं चकनाचूर
हृदय से टकराकर भरपूर
उमड़-घुमड़कर घिर-घिर आता है बरसाती प्यार !
उन्मन मन पर एक अजब-सा अलस उदासी भार !

नील धुएँ से ढंक जाती उज्जवल पलकों की भोर
स्मृतियों के सौरभ से लदकर चलती श्वास झकोर
कि रुक जाता धड़कन का तार
कि झुक जाती सपनों की डार
छितरा जाता कुसुम हृदय का ज्यों गुलाब बीमार
उन्मन मन पर एक अजब-सा अलस उदासी भार !

स्वर्ण-धूल स्मृतियों की नस की रस-बूंदों में आज
गुंथी हुई है ऐसे जैसे प्रथम प्रनय में लाज,
बोल में अजब दरद के स्वर,
कि जैसे मरकत शय्या पर
पड़ी हुई हो घायल कोई स्वर्ण-किरण सुकुमार !

उन्मन मन पर एक अजब-सा अलस उदासी भार !

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