-उत्साही उज्जवल -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Utsahi Ujjwal

हम तुझसे बिछड़कर उदास कितने थे-उत्साही उज्जवल -Hindi Poetry-हिंदी कविता -Hindi Poem | Hindi Kavita Utsahi Ujjwal

 

हम तुझसे बिछड़कर उदास कितने थे
तुम्हारे सिवा लोग आसपास कितने थे

मिली तो आज भी पेश आई गैरों की तरह
हमनें तुमसे से लगाए आस कितने थे

नींद, चैन,ख़ुशी क्या क्या नहीं खोया
तुम से पहले हम बिंदास कितने थे

पड़े है सारे ख़्वाब मन के किसी कोने में
इश्क़ के मन में आभास कितने थे

तुने ख़ुद ही ख़ुद को तबाह किया ‘उज्जवल”
नहीं तो जग में तेरे मोहताज़ कितने थे

 

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